Ganesh Chalisa PDF Download

Ganesh Chalisa PDF Download | गणेश चालीसा इन हिंदी pdf: Here provided the download link of the Shri Ganesh Chalisa pdf | Ganesh Chalisa lyrics in Hindi pdf. You can easily Ganesh Chalisa in Hindi pdf download here.

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गणेश की पूजा हिंदू धर्म में किसी भी तरह के अच्छे काम करने से पहले गणेश की पूजा की जाती है।
गणेश भगवान गणेश के स्वामी के रूप में जाने जाते हैं, इसलिए उनका नाम गणेश के रूप में जाना जाने लगा.

गणेश जी का हाथी मुख होने के कारण उन्हें गजानंद भी कहा जाता है, पीडीएफ गणेश चालीसा में भगवान गणेश की महिमा का उल्लेख है.

भगवान गणेश का जब जन्म हुआ तब आकाश से फूल बरसने लगे, उनके जन्म से देवता प्रसन्न हुए कीसभी देवताओं और ऋषियों उन्हें देखने आने लगे और पार्वती जी सबको कुछ न कुछ दान में सबको देने लगे.

Ganesh chalisa hindi pdf को पूरे भारत में गणेश चतुर्थी आदि जैसे त्योहारों के दिनों में सबसे ज्यादा जाप होता है।गणेश चालीसा भगवान गणेश को समर्पित एक बहुत लोकप्रिय चालीसा है।

गणेश चालीसा 22 श्लोकों का एक संग्रह है जो गणेश की स्तुति करता है, बाधाओं को दूर करने वाला और बुराइयों का नाश करने वाला.

Shree ganesh chalisa pdf एक भक्तिपूर्ण भजन है जो हाथी के सिर वाले हिंदू भगवान, गणेश की स्तुति करता है.

Ganesh chalisa in pdf को विभिन्न अवसरों पर गाया जाता है जैसे कि जब कोई बाधाओं से छुटकारा पाना चाहता है या गणेश से सहायता की आवश्यकता के समय अगर किसी को विवाह , धन प्राप्ति , शत्रु सम्बंधित सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है.

इसके अलावा, गणेश चालीसा का जाप किसी भी नए व्यापर को शुरू करने से पहले प्रार्थना के रूप में भी किया जाता है.

Shri ganesh chalisa in hindi pdf का पाठ करते समय गणेश जी की मूर्ति या उनके फोटो के सामने गणेश चालीसा का पाठ करें और पाठ करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें.

और गणेश चालीसा इन हिंदी पीडीएफ का पाठ करने के लिए बैठ जाएं और पाठ करने तक पूर्व और उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं, और प्रसाद के रूप में गणेश जी को मोदक या बूंदी के लड्डू अवश्य चढ़ाये.

Ganesh chalisa lyrics in hindi pdf | Shri ganesh chalisa pdf

जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥

जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥

ऋद्धि सिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥

गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज शिर लाए॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥

मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

दोहा

श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥

सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

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