Vindheshwari Chalisa PDF Download

Vindheshwari Chalisa PDF Download |विन्धेश्वरी चालीसा pdf: Here provided the download link of the Baglamukhi Chalisa Hindi pdf. You can easily Shree Vindheshwari Chalisa pdf download.

Vindheshwari Chalisa PDF Download |विन्धेश्वरी चालीसा pdf

विन्धेश्वरी चालीसा श्री विन्धेश्वरी माताजी शक्ति परंपरा की एक हिंदू देवी की स्तुति में एक भक्ति भजन है।

इस माता के जन्म की बात करते हुए श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार जब श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा जेल में हुआ था, तब वासुदेव ने रात में कृष्ण को यमुना नदी के दूसरी ओर गोकुल गांव में नंदजी के घर पहुंचाया था।

और अगर नंद जी के घर एक बच्ची का जन्म हुआ तो वासुदेव बच्ची को अपने साथ मथुरा जेल ले आए।

तो जब राजा कंश को पता चलता है कि देवकी जी की आठवीं संतान का जन्म हो गया है, तो वह आकर इस लड़की को जोर से दीवार की ओर फेंक देते हैं, तब वही कन्या देवी के रूप में प्रकट होती है, तो यह विन्धेश्वरी माता है।

विन्धेश्वरी चालीसा का अभ्यास करने से भक्त के जीवन में और उसके घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। विन्धेश्वरी चालीसा विन्धेश्वरी देवी के परोपकारी रूप को दर्शाती है.

||दोहा||

नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब।
सन्तजनों के काज में करती नहीं विलम्ब।

||चौपाई ||

जय जय विन्ध्याचल रानी, आदि शक्ति जग विदित भवानी।
सिंहवाहिनी जय जग माता, जय जय त्रिभुवन सुखदाता।

कष्ट निवारिणी जय जग देवी, जय जय असुरासुर सेवी।
महिमा अमित अपार तुम्हारी, शेष सहस्र मुख वर्णत हारी।

दीनन के दुख हरत भवानी, नहिं देख्यो तुम सम कोई दानी।
सब कर मनसा पुरवत माता, महिमा अमित जग विख्याता।

जो जन ध्यान तुम्हारो लावे, सो तुरतहिं वांछित फल पावै।
तू ही वैष्णवी तू ही रुद्राणी, तू ही शारदा अरु ब्रह्माणी।

रमा राधिका श्यामा काली, तू ही मातु सन्तन प्रतिपाली।
उमा माधवी चण्डी ज्वाला, बेगि मोहि पर होहु दयाला।

तू ही हिंगलाज महारानी, तू ही शीतला अरु विज्ञानी।
दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता, तू ही लक्ष्मी जग सुख दाता।

तू ही जाह्नवी अरु उत्राणी, हेमावती अम्बे निरवाणी।
अष्टभुजी वाराहिनी देवी, करत विष्णु शिव जाकर सेवा।

चौसठ देवी कल्यानी, गौरी मंगला सब गुण खानी।
पाटन मुम्बा दन्त कुमारी, भद्रकाली सुन विनय हमारी।

वज्र धारिणी शोक नाशिनी, आयु रक्षिणी विन्ध्यवासिनी।
जया और विजया बैताली, मातु संकटी अरु विकराली।

नाम अनन्त तुम्हार भवानी, बरनै किमि मानुष अज्ञानी।
जापर कृपा मातु तव होई, तो वह करै चहै मन जोई।

कृपा करहुं मोपर महारानी, सिद्ध करिए अब यह मम बानी।
जो नर धरै मात कर ध्याना, ताकर सदा होय कल्याना।

विपति ताहि सपनेहु नहिं आवै, जो देवी का जाप करावै।
जो नर कहं ऋण होय अपारा, सो नर पाठ करै शतबारा।

निश्चय ऋण मोचन होइ जाई, जो नर पाठ करै मन लाई।
अस्तुति जो नर पढ़ै पढ़ावै, या जग में सो अति सुख पावै।

जाको व्याधि सतावे भाई, जाप करत सब दूर पराई।
जो नर अति बन्दी महं होई, बार हजार पाठ कर सोई।

निश्चय बन्दी ते छुटि जाई, सत्य वचन मम मानहुं भाई।
जा पर जो कछु संकट होई, निश्चय देविहिं सुमिरै सोई।

जा कहं पुत्र होय नहिं भाई, सो नर या विधि करे उपाई।
पांच वर्ष सो पाठ करावै, नौरातन में विप्र जिमावै।

निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी, पुत्र देहिं ताकहं गुण खानी।
ध्वजा नारियल आनि चढ़ावै, विधि समेत पूजन करवावै।

नित्य प्रति पाठ करै मन लाई, प्रेम सहित नहिं आन उपाई।
यह श्री विन्ध्याचल चालीसा, रंक पढ़त होवे अवनीसा।

यह जनि अचरज मानहुं भाई, कृपा दृष्टि तापर होइ जाई।
जय जय जय जग मातु भवानी, कृपा करहुं मोहिं पर जन जानी।

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